सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार और नगर नियोजन के कोचिंग नोट्स यहां दिए गए है। सावधानी से एक एक लाइन को पढ़ें, समझें ओर याद करें।
सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार
- सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार (भारत पाकिस्तान व अफ़गानिस्तान) तीन देशों में है ।
- सिंधु घाटी सभ्यता का सर्वाधिक विस्तार भारत देश में है जबकि सबसे कम विस्तार अफगानिस्तान देश में है ।
- सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे उत्तरतम बिंदु अफगानिस्तान में स्थित मुंडीगोग व शाँत्गोई है जबकि इसका सबसे उत्तरतम बिन्दु शाँत्गोई है ।
- भारत में इस सभ्यता का पश्चिमी छोर गुजरात में स्थित नागेश्वर है ।
- हाल ही में खोजे गए दो स्थल करीमशाही (गुजरात) व वेगीकोट (थार का मरुस्थल) से इस सभ्यता का विनाश जलवायु परिवर्तन से हुआ है । यहां से इस प्रकार के साक्ष्य मिलते हैं ।
- गुजरात स्थित कोटडा भादली से डेयरी उत्पादन के साक्ष्य मिले हैं ।
- धोलावीरा को हाल ही में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है जो कि विश्व विरासत सूची में शामिल होने वाला भारत का 40वां स्थल बना है ।
- लोथल में मैरिटाइम म्यूजियम केंद्र स्थापित किया जा रहा है ।
- हाल ही में हरियाणा के कुणाल से कुछ मृदभाण्ड प्राप्त हुए हैं जो कि लगभग 8000 से 7000 ईसा पूर्व के माने जाते हैं । यदि ये प्रमाणित रूप से साबित हो जाता है तो सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता बन जाएगी ।
- हरियाणा सरकार ने राखीगढ़ी को हेरिटेज साइट घोषित किया है ।
- सिंधु घाटी सभ्यता का उत्तर से दक्षिण का विस्तार 1400 किलोमीटर है ।
- सिंधु घाटी सभ्यता का पूर्व से पश्चिम का विस्तार 1600 किलोमीटर है ।
- सिंधु घाटी सभ्यता का पश्चिमी छोर सुत्कांगेडोर (बलूचिस्तान) दाश्क नदी के किनारे है ।
- सिंधु घाटी सभ्यता का उत्तरी बिंदु मांडा (अखनूर) J&K चेनाब नदी के किनारे स्थित है ।
- सिंधु घाटी सभ्यता का पूर्वी छोर आलमगीर (U.P मेरठ) हिन्डन (यमुना) नदी के किनारे स्थित है ।
- सिंधु घाटी सभ्यता का दक्षिणी छोर दैमाबाद (महाराष्ट्र अहमदनगर) प्रवरा (गोदावरी) नदी के किनारे स्थित है ।
- मोहनजोदड़ो से प्राप्त हार पर विभाजन के समय भारत व पाकिस्तान के मध्य बड़ा विवाद हुआ था । इस हार का बाद में बंटवारा कर लिया गया ।
सिंधु घाटी सभ्यता का नगर नियोजन
- संपूर्ण सिंधु सभ्यता के नगर दो भागों में विभाजित थे जबकि धोलावीरा एकमात्र ऐसा नगर था जो की तीन भागों में विभाजित था ।
- सिंधु घाटी सभ्यता के नगर के पहले भाग को छोटा टीला के नाम से जाना जाता है । इस भाग के अन्य नाम दुर्ग टीला, ऊचला टीला, पश्चिमी टीला, ऊंचाई पर स्थित टीला आदि है |
- नगर के पहले भाग को मॉर्टिमर व्हीलर ने माउंट AB कहा है ।
- सिंधु घाटी सभ्यता के नगर के दूसरे भाग को बड़ा टीला के नाम से जाना जाता है । इस भाग के अन्य नाम निचला नगर, नगर टीला, पूर्वी टीला आदि है ।
सिंधु घाटी सभ्यता में मकान नियोजन
- सिंधु घाटी सभ्यता में मकान एक मंजिला व बहु मंजिला मिले हैं तथा यहां से एक कक्षीय आवास भी मिले हैं जो कि सैंधव सभ्यता में व्याप्त वर्ग विभेद को दर्शाता है ।
- सिंधु घाटी सभ्यता के आवास निर्माण में कच्ची व पक्की ईंटों का प्रयोग किया जाता था ।
- कच्ची ईंटों से निर्मित मकानों के साक्ष्य कालीबंगा, लोथल व रंगपुर से प्राप्त होते हैं ।
- सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त ईंटों का अनुपात 4:2:1 है ।
- सिंधु घाटी सभ्यता के मकानों के दरवाजे आमने-सामने गलियों में खुला करते थे ।
- लोथल संपूर्ण सैंधव सभ्यता का एकमात्र ऐसा स्थल है जहां से मकान के दरवाजे मुख्य सड़क की ओर खुलने के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं ।
सिंधु घाटी सभ्यता में नाली नियोजन
- संपूर्ण सैंधव सभ्यता की सबसे प्रमुख विशेषता इसकी नाली नियोजन व्यवस्था थी ।
- नालियां सामान्यतः सड़क के किनारे बनाई जाती थी जो कि नगर टीले से बाहर की तरफ निकाल दी जाती थी ।
- नाली निर्माण में वस्तुतः पक्की ईंटों का प्रयोग किया जाता था ।
- संपूर्ण सैंधव सभ्यता में बनावली एकमात्र ऐसा स्थल है जहां से नाली व्यवस्था का अभाव मिलता है जबकि कालीबंगा से लकड़ी से निर्मित नालियों के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं ।
सिंधु घाटी सभ्यता में सड़क नियोजन
- नगर में समानांतर सड़कों का जाल बिछा हुआ था जो कि एक दूसरे को समकोण पर काटती थी । जिसे ऑक्सफोर्ड सर्कस पद्धति, ग्रिड पैटर्न या मैश पद्धति कहा जाता था ।
- सामान्यतः सैंधव नगर की सड़कें कच्ची मिट्टी से निर्मित होती थी जहां उसके किनारो पर कच्ची अर्ध्द पकाई ईंटों का भी प्रयोग किया जाता था ।
- सिंधु घाटी सभ्यता की सड़के सामान्य 9 से 16 फुट चौड़ी होती थी ।
- सिंधु घाटी सभ्यता में नगर की मुख्य सड़क उत्तर से दक्षिण की ओर जाती थी व अन्य सड़क पूर्व से पश्चिम की ओर जाती थी।
सिंधु घाटी सभ्यता में रक्षा प्राचीर नियोजन
- दुर्ग टीला व नगर टीला रक्षा प्राचीर से गिरा हुआ होता था ।
- सिंधु घाटी सभ्यता में रक्षा प्राचीर का निर्माण ईंटों के माध्यम से किया जाता था ।
- हड़प्पा, मोहनजोदड़ो व कालीबंगा से दोहरी रक्षा प्राचीर के साक्ष्य मिले हैं ।
- धोलावीरा एकमात्र ऐसा स्थल है जहां से पत्थर से निर्मित रक्षा प्राचीर के साक्ष्य मिले हैं । यहां दुर्ग टीला, नगर टीला व मध्यमा अलग-अलग रक्षा प्राचीर से गिरे हुए पाए गए हैं ।
- धोलावीरा से प्राप्त स्टेडियम की भी अलग रक्षा प्राचीर प्राप्त हुई हैं ।
- चन्हूदड़ों से दुर्ग टीले व रक्षा प्राचीन के अभाव मिले हैं ।
- धोलावीरा से तिहरी रक्षा प्राचीर प्राप्त हुई है ।
सिंधु घाटी सभ्यता की लिपी, उद्भव और नामकरण के कोचिंग के नोट्स यहां से पढ़े click