खण्ड – अ (बहुविकल्पीय एवं रिक्त स्थान प्रश्न)
1. ‘वह तेज दौड़ता है’ वाक्य में ‘तेज’ कौन सा पद है?
- उत्तर: (स) क्रिया-विशेषण
2. ‘जो परिश्रम करेगा, वह सफल होगा।’ वाक्य में ‘जो-वह’ किस प्रकार के सर्वनाम हैं?
- उत्तर: (अ) संबंधवाचक सर्वनाम
3. बालगोबिन भगत के जीवन का सबसे प्रिय कार्य क्या था?
- उत्तर: (ब) कबीर के पद गाना
4. लेखिका मन्नू भंडारी के पिता के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी?
- उत्तर: (ब) आदर्शवाद और सिद्धांतप्रियता
5. ‘नेताजी का चश्मा’ पाठ में कस्बे की मूर्ति पर बार-बार चश्मा कौन बदलता था?
- उत्तर: (ब) कैप्टन
6. लेखक के अनुसार ‘संस्कृति’ किसके योग का नाम है?
- उत्तर: (स) सभ्यता और संस्कार
7. ‘अट नहीं रही है’ कविता में किस ऋतु का वर्णन है?
- उत्तर: (ब) फागुन ऋतु का
8. ‘संगतकार’ कविता में संगतकार की आवाज मुख्य गायक के स्वर में कब दब जाती है?
- उत्तर: (ब) जब मुख्य गायक का स्वर चरम पर हो
9. ‘माता का अंचल’ पाठ के लेखक हैं—
- उत्तर: (अ) शिवपूजन सहाय
10. अज्ञेय के अनुसार सच्चा लेखक किसे माना जाना चाहिए?
- उत्तर: (ब) जो अनुभूति को ईमानदारी से व्यक्त करे
11. ‘नीलकंठ’ शब्द में समास है:
- उत्तर: बहुब्रीहि समास
12. ‘देवालय’ का संधि-विच्छेद है:
- उत्तर: देव + आलय
13. वे शब्दांश जो किसी शब्द के अंत में जुड़कर उसके अर्थ या रूप में परिवर्तन कर देते हैं, उन्हें क्या कहते हैं?
- उत्तर: प्रत्यय
14. ‘प्रतिकूल’ शब्द में उपसर्ग है:
- उत्तर: प्रति
15. “चौराहे की अधिकांश दुकानें बंद थीं” वाक्य में क्रिया-पद क्या है?
- उत्तर: बंद
16. ‘भगवान श्रीकृष्ण के घुंघराले बाल हैं।’ इस वाक्य में विशेषण शब्द क्या है?
- उत्तर: घुंघराले
खण्ड – ब (अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न – शब्द सीमा लगभग 40 शब्द)
17. बिस्मिल्ला खाँ ने संगीत साधना को किस प्रकार समृद्ध किया?
- उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ ने अपनी साधना और रियाज के माध्यम से भारतीय संगीत (विशेषकर शहनाई वादन) को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई। उन्होंने धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर संगीत को सच्ची आराधना बनाया तथा काशी की सांस्कृतिक व पारंपरिक विरासत को अपनी धुन के जरिए जीवंत एवं समृद्ध रखा।
18. गोपियों ने उद्धव को किस प्रकार उलाहना दिया?
- उत्तर: गोपियों ने उद्धव को उलाहना देते हुए कहा कि वे बड़े भाग्यशाली हैं जो प्रेम के बंधन से पूरी तरह अछूते और अनासक्त रहे हैं। उन्होंने व्यंग्य किया कि जिस प्रकार कमल का पत्ता जल में रहकर भी पानी से अप्रभावित रहता है, ठीक वैसे ही उद्धव ने प्रेम रूपी नदी में पाँव नहीं डुबोया और वे कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम को नहीं समझ पाए।
19. तुलसीदास के भाषा-सौन्दर्य पर अपने विचार लिखिए।
- उत्तर: तुलसीदास जी की भाषा में अद्भुत प्रवाह, माधुर्य और शक्ति है। उन्होंने मुख्य रूप से अवधी और ब्रजभाषा का अत्यंत सहज, प्रभावी और परिष्कृत रूप में प्रयोग किया है। उनकी रचनाओं में प्रबंध और मुक्तक दोनों शैलियों का सुंदर समन्वय मिलता है तथा लोकोक्तियों व मुहावरों के प्रयोग से भाषा में जीवंतता आ जाती है।
20. “पाट-पाट शोभा श्री पट नहीं रही है।” पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
- उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि फागुन मास की प्राकृतिक सुंदरता इतनी अधिक और मनमोहक है कि वह चारों तरफ समा नहीं पा रही है (छिटक रही है)। प्रकृति का यह उल्लास, हर डाल पर खिले लाल-हरे फूल-पत्ते और मादक सौंदर्य पेड़-पौधों की सीमाओं से बाहर छलक पड़ता है।
21. ‘माता का अंचल’ पाठ में बालक के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
- उत्तर: पाठ में माता-पिता का बच्चों के प्रति अनन्य प्रेम (वात्सल्य) सजीव रूप से झलकता है। माता अपने हाथों से बच्चे को भोजन कराना, उसके लंबे बालों में तेल डालकर चोटी गूँथना और किसी भी विपत्ति या डर के समय उसे अपनी आंचल की छांव में सुरक्षित महसूस कराना—यह सब भारतीय ग्रामीण संस्कृति के सहज और निश्चल वात्सल्य को दर्शाता है।
22. “थू-थू करना” मुहावरे का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए।
- उत्तर:
- अर्थ: घृणा प्रकट करना, निंदा करना या बेइज्जती होना।
- वाक्य प्रयोग: समाज में भ्रष्टाचार और घृणित कार्य करने वाले व्यक्ति के सामने आते ही लोग उस पर थू-थू करने लगते हैं।
खण्ड – स (लघूत्तरात्मक प्रश्न)
23. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
- 1) सच्चे वीर और कायर में क्या अंतर है?
- उत्तर: सच्चा वीर शत्रु को क्षमा कर देता है, जबकि कायर हमेशा प्रतिशोध (بدले) की आग में जलता रहता है।
- 2) ‘निर्भय होकर सत्य के पथ पर चलना’ किसे कहा गया है?
- उत्तर: निर्भय होकर सत्य के पथ पर चलना ही ‘शौर्य’ (वीरता) कहा गया है।
- 3) इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
- उत्तर: गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक “सच्ची वीरता” या “शौर्य की परिभाषा” है।
24. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
- 1) वैश्वीकरण ने विश्व को क्या बना दिया है?
- उत्तर: वैश्वीकरण ने पूरे विश्व को एक छोटा सा ‘गाँव’ बना दिया है।
- 2) युवा पीढ़ी किस कारण अपनी जड़ों से कट रही है?
- उत्तर: युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति (पश्चिमी देशों) के अंधानुकरण और विदेशी प्रभाव के कारण अपनी जड़ों से कट रही है।
- 3) गद्यांश के अनुसार प्रगति के साथ-साथ क्या अनिवार्य है?
- उत्तर: प्रगति के साथ-साथ अपनी ‘सांस्कृतिक अस्मिता’ (संस्कृति और पहचान) की रक्षा करना भी अनिवार्य है।
25. निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
- 1) कवि ने ‘शाश्वत मौन’ किसे कहा है?
- उत्तर: कवि ने हिमालय पर्वत (हिमगिरि) को ‘शाश्वत मौन’ कहा है।
- 2) ‘एक हृदय का स्पंदन’ किस देश को कहा गया है?
- उत्तर: ‘एक हृदय का स्पंदन’ हमारे देश भारत को कहा गया है, जहाँ अनेक वेश-भाषा होने पर भी सभी देशवासियों का दिल एक साथ धड़कता है।
- 3) इस पद्यांश का उचित शीर्षक क्या होगा?
- उत्तर: पद्यांश का उचित शीर्षक “मेरा देश महान” या “अनेकता में एकता” हो सकता है।
26. निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
- 1) कवि ने भारत को क्या कहा है?
- उत्तर: कवि ने भारत को ‘ऋषि भूमि’ और प्रकृति का पुण्य लीला-स्थल कहा है।
- 2) कवि सभी से मिलकर क्या विचारने को कह रहे हैं?
- उत्तर: कवि सभी से मिलकर यह विचारने को कह रहे हैं कि “हम कौन थे, क्या हो गए हैं और आगे क्या होंगे”।
- 3) ‘मनोहर गिरि हिमालय’ और गंगाजल किस देश में है?
- उत्तर: ‘मनोहर गिरि हिमालय’ और पवित्र गंगाजल हमारे अपने देश भारत वर्ष में स्थित हैं।
27. निम्नलिखित पठित गद्यांश को पढ़कर इसकी सप्रसंग व्याख्या अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए—
“काशी संस्कृति की पाठशाला है। शास्त्रों में आनंद कानन के नाम से प्रतिष्ठित। काशी में कलाधर हनुमान व नृत्य विश्वनाथ है। काशी में बिस्मिल्ला खाँ है। काशी में हजारों सालों का इतिहास है जिसमें पंडित कंठे महाराज है, विद्याघरी है, बड़े रामदास जी है, मौजुद्दीन खाँ है व इन रसिकों से उपकृत होने वाला अपार जन-समूह है। यह एक अलग काशी है जिसकी अलग तहज़ीब है, अपनी बोली और अपने विशिष्ट लोग हैं।”
- उत्तर (सप्रसंग व्याख्या):
- प्रसंग: यह गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘क्षितिज भाग-2’ में संकलित पाठ ‘नौबतखाने में इबादत’ (लेखक – यतिेंद्र मिश्र) से लिया गया है। इसमें लेखक ने प्राचीन नगरी काशी की सांस्कृतिक समृद्धि, उसकी अनूठी परंपरा और वहाँ के प्रतिष्ठित संगीतकारों व कलाकारों का सुंदर चित्रण किया है।
- व्याख्या: लेखक कहते हैं कि काशी शहर केवल एक नगर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और कला का एक जीवंत शिक्षण संस्थान (पाठशाला) है। धार्मिक ग्रंथों में इसे ‘आनंद कानन’ (आनंद का वन) के रूप में प्रतिष्ठित माना गया है। इस नगरी में कला के बड़े-बड़े केंद्र, मंदिर और महान कलाकार हुए हैं। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई की गूँज इसी काशी की मिट्टी से जुड़ी है। यहाँ हजारों वर्षों का गौरवशाली इतिहास है, जिसमें पंडित कंठे महाराज, विद्याघरी, बड़े रामदास जी और मौजुद्दीन खाँ जैसे महान संगीतकार व रसिक शामिल हैं। इन सभी कलाकारों से प्रेरणा लेने वाला और इनकी कला का सम्मान करने वाला एक विशाल जन-समूह यहाँ मौजूद है। काशी की संस्कृति, यहाँ की तहजीब (सभ्यता), यहाँ की भाषा और यहाँ के विशिष्ट लोग इसे दुनिया के अन्य शहरों से बिल्कुल अलग और अनूठा बनाते हैं।
28. निम्नलिखित पठित पद्यांश को पढ़कर इसकी सप्रसंग व्याख्या अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए—
“बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।। येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाई कह भृगुकुलकेतू।।”
- उत्तर (सप्रसंग व्याख्या):
- प्रसंग: यह काव्यांश महाकवि तुलसीदास द्वारा रचित महाकाव्य ‘रामचरितमानस’ के ‘बालकांड’ के अंतर्गत ‘राम-परशुराम संवाद’ से अवतरित है। जब भगवान शिव के धनुष (धनुर्भंग) के टूटने पर परशुराम जी अत्यधिक क्रोधित होकर सभा में आते हैं, तब श्रीलक्ष्णण जी उनसे व्यंग्यपूर्ण व विनम्र वचनों में संवाद करते हैं।
- व्याख्या: लक्ष्मण जी परशुराम जी के क्रोध को देखकर मुस्कुराते हुए व्यंग्य में कहते हैं कि हे स्वामी! हमने अपने बचपन में ऐसी बहुत सी छोटी-बधनुषियाँ (धनुहियाँ) तोड़ डाली थीं, लेकिन तब तो आपने कभी इतना अधिक गुस्सा या क्रोध नहीं किया था। फिर इसी एक धनुष पर आपकी इतनी अधिक ममता या मोह क्यों जुड़ा हुआ है? लक्ष्मण जी के इस प्रकार के तीखे और तर्कपूर्ण वचन सुनकर ‘भृगुकुलकेतू’ अर्थात क्रोधी स्वभाव वाले परशुराम जी और अधिक गुस्से में भरकर वचन बोलने लगे।
29. ‘मन्नू भंडारी’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
- उत्तर:
- परिचय एवं व्यक्तित्व: मन्नू भंडारी हिंदी साहित्य की प्रख्यात कहानीकार और उपन्यासकार थीं। आपका जन्म सन 1931 में मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ था। आपकी प्रारंभिक शिक्षा अजमेर में हुई और बाद में उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। उनके लेखन में नारी स्वतंत्रता, समाज की विसंगतियों और मानवीय संवेदनाओं का सजीव चित्रण देखने को मिलता है।
- प्रमुख कृतियाँ:
- उपन्यास: ‘आपका बंटी’, ‘महाभोज’, ‘एक इंच मुस्कान’।
- कहानी-संग्रह: ‘मैं हार गई’, ‘तीन निगाहों की एक तस्वीर’, ‘यही सच है’, ‘छँटे हुए बिन्दु’।
- नाटक: ‘महाभोज’ (मंचित नाटक)।
- सम्मान: उन्हें उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए हिंदी अकादमी, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान तथा अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया था।
30. अज्ञेय के अनुसार लेखक का दायित्व क्या है? समझाइये।
- उत्तर: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ के अनुसार एक सच्चे लेखक का सबसे बड़ा दायित्व यह है कि वह अपनी आंतरिक अनुभूति को पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ अभिव्यक्ति दे। लेखक केवल समाज या सरकार की प्रशंसा करने या किसी बाहरी दिखावे के लिए नहीं लिखता, बल्कि उसके भीतर जो सत्य और अनुभव उत्पन्न होते हैं, उन्हें बिना किसी मिलावट के पाठकों तक पहुँचाना ही उसका मुख्य कर्तव्य व दायित्व होता है।
प्रश्न 31: ‘नेताजी का चश्मा’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि देशभक्ति केवल दिखावा नहीं, बल्कि संवेदनशील कर्तव्य है। कैप्टन चश्मे वाले के चरित्र से क्या सीख मिलती है?
- उत्तर: ‘नेताजी का चश्मा’ पाठ से यह संदेश मिलता है कि देशभक्ति केवल नारों या दिखावे तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के प्रति हमारा संवेदनशील और सच्चा कर्तव्य है। कैप्टन चश्मे वाले के चरित्र से हमें यह सीख मिलती है कि देशहित और राष्ट्रप्रेम के लिए बड़े पदों या हथियारों की जरूरत नहीं होती; एक आम नागरिक भी अपनी क्षमता और समर्पण (जैसे मूर्ति पर चश्मा लगाकर नेताजी के प्रति सम्मान प्रकट करना) के जरिए देश के प्रति अपनी सच्ची देशभक्ति निभा सकता है।
प्रश्न 32: केस स्टडी को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए:
सिक्किम में बादल फटने से भारी बाढ़ आ जाती है। लेखिका मधु कांकरिया तीर्थ यात्रा पर गई थी। अचानक रास्ते बंद, बिजली गुल और खाने-पीने की किल्लत हो जाती है। जगह-जगह लोग फंसे हैं, बच्चे भूखे हैं, बूढ़े बीमार हैं। प्राकृतिक आपदा के कारण जीवन अस्त-व्यस्त और लोगों में डर व असहायता की स्थिति बनी हुई है। सेना व स्थानीय लोग राहत कार्य में जुटते हैं। लेखिका देखती है कि विपत्ति में सभी लोग एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। अनेक लोग बचाव कार्य में उपयोग आने वाली सामग्री लेकर आ रहे हैं। आपदा में मानवीय एकता और प्रकृति के प्रति श्रद्धा ही सबसे बड़ी शक्ति है।
- 1) लेखिका को सिक्किम में किस समस्या का सामना करना पड़ा?
- उत्तर: सिक्किम में बादल फटने से आई भारी बाढ़ के कारण रास्ते बंद होने, बिजली गुल होने और खाने-पीने की भारी किल्लत (समस्या) का सामना करना पड़ा।
- 2) आपदा के समय लोगों ने एक-दूसरे की मदद कैसे की?
- उत्तर: आपदा के समय सेना और स्थानीय लोगों ने मिलकर राहत कार्य किया तथा अनेक लोग बचाव कार्य में उपयोग आने वाली आवश्यक सामग्री लेकर पीड़ित लोगों की मदद के लिए आगे आए।
- 3) आपदा में सबसे बड़ी शक्ति किसे बताया गया है?
- उत्तर: आपदा के समय ‘मानवीय एकता’ और ‘प्रकृति के प्रति श्रद्धा’ को सबसे बड़ी शक्ति बताया गया है।
- 4) इस केस स्टडी से हमें क्या सीख मिलती है?
- उत्तर: इस केस स्टडी से यह सीख मिलती है कि संकट या प्राकृतिक आपदा के समय डरने के बजाय आपसी भाईचारे, मानवीय एकता और एकजुटता के साथ एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए।
प्रश्न 33: निम्नलिखित अवतरण का संक्षिप्तीकरण कीजिए। (उत्तर सीमा 30-40 शब्द)
समय संसार की सबसे मूल्यवान सम्पति है। धन खोकर फिर कमाया जा सकता है, स्वास्थ्य बिगड़कर सुधारा जा सकता है, परन्तु बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता। विद्यार्थी जीवन में समय का सदुपयोग ही सफलता की कुंजी है। जो छात्र नियमित पढ़ाई करते हैं, वही जीवन में आगे बढ़ते हैं समय का दुरूपयोग करने वाले बाद में पछताते हैं। आलस्य और टालमटोल समय के सबसे बड़े शत्रु हैं इसलिए प्रत्येक क्षण को पहचाने और उसका सही उपयोग करें।
- उत्तर (संक्षिप्तीकरण): समय दुनिया की सबसे मूल्यवान संपत्ति है, क्योंकि बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। विद्यार्थी जीवन में समय का सदुपयोग और नियमित परिश्रम ही सफलता की असली कुंजी है। आलस्य और टालमटोल समय के सबसे बड़े शत्रु हैं, इसलिए हमें हर पल को पहचानकर उसका सही उपयोग करना चाहिए, अन्यथा बाद में पछताना पड़ता है।
प्रश्न 34: आपके मोहल्ले में पिछले एक महीने से नियमित रूप से कचरा नहीं उठ रहा है, जिससे बीमारी फैलने का खतरा है। इस समस्या के समाधान हेतु नगर निगम अधिकारी, जोधपुर को एक शिकायती पत्र लिखिए।
- उत्तर:
सेवा में,
माननीय नगर निगम आयुक्त महोदय,
नगर निगम, जोधपुर (राजस्थान)।
विषय: मोहल्ले में नियमित रूप से कचरा नहीं उठने और गंदगी की समस्या के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं जोधपुर शहर के एक मोहल्ले का निवासी हूँ। हमारे क्षेत्र में पिछले एक महीने से सफाई कर्मचारियों की अनियमितता के कारण नियमित रूप से कचरा नहीं उठाया जा रहा है। स्थिति यह है कि जगह-जगह कचरे के ढेर लग गए हैं, जिनमें से भीषण दुर्गंध आ रही है और मक्खी-मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है।
इस भयंकर गंदगी के कारण मोहल्ले में संक्रामक बीमारियाँ फैलने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। बच्चों और वृद्धों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया है।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस गंभीर समस्या की शीघ्र जाँच करवाकर हमारे मोहल्ले में प्रतिदिन नियमित कचरा उठवाने की व्यवस्था करवाएं, ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके ।
दिनांक: 06 नवंबर 2026 भवदीय,
स्थान: जोधपुर समस्त मोहल्लावासी /
एक जागरूक नागरिक
प्रश्न 35: निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए: विषय: प्लास्टिक का उपयोग : सुविधा या दुविधा
- उत्तर:
- (i) प्रस्तावना: आज के आधुनिक युग में प्लास्टिक हमारे दैनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। अपनी कम लागत, हल्के वजन और टिकाऊपन के कारण इसने रसोई से लेकर बड़े-बड़े उद्योगों तक अपनी गहरी पैठ बना ली है। लेकिन आज यह सवाल खड़ा होता है कि क्या प्लास्टिक वास्तव में हमारे लिए एक ‘सुविधा’ है या आने वाले समय की सबसे बड़ी ‘दुविधा’?
- (ii) प्लास्टिक के बढ़ते प्रयोग के कारण: प्लास्टिक का चलन इसलिए तेजी से बढ़ा क्योंकि यह काँच या मिट्टी के बर्तनों की तरह आसानी से टूटता नहीं है, पानी और नमी से सुरक्षित रहता है और बेहद सस्ता होता है। पॉलीथिन बैग्स, प्लास्टिक की बोतलें और डिस्पोजेबल सामानों ने लोगों को तात्कालिक रूप से जीवन में बहुत आसानी और सुविधा प्रदान की है।
- (iii) पर्यावरण पर प्रभाव: यद्यपि प्लास्टिक उपयोग में सुविधाजनक है, लेकिन इसका पर्यावरण पर अत्यंत घातक प्रभाव पड़ता है। प्लास्टिक एक अजैवनिम्नीकरणीय (Non-biodegradable) पदार्थ है जो सैकड़ों वर्षों तक मिट्टी में नष्ट नहीं होता। इसके कारण उपजाऊ मिट्टी खराब हो रही है, नालियाँ अवरुद्ध हो जाती हैं और चारे के साथ प्लास्टिक खाने से बेकसूर मवेशियों की मौत तक हो जाती है। इसके जलने से निकलने वाली जहरीली गैसें वायु प्रदूषण को बढ़ावा देती हैं।
- (iv) नियंत्रण के उपाय: इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए हमें कड़े कदम उठाने होंगे। सरकार द्वारा सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए। नागरिकों को चाहिए कि वे बाजार जाते समय कपड़े या जूट के थैले साथ लेकर जाएं और प्लास्टिक के प्रयोग को न्यूनतम करें।
- (v) उपसंहार: निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि प्लास्टिक ने जीवन को भले ही कुछ पलों की सुविधा दी हो, लेकिन यह हमारी प्रकृति और भविष्य के लिए एक विकराल दुविधा बन चुका है। समय रहते यदि हमने इसके विकल्प (जैसे कागज या कपड़े के थैले) नहीं अपनाए, तो संपूर्ण धरती का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। पर्यावरण को बचाना ही हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रश्न 36: केस स्टडी को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए:
एक लेखक ट्रेन में सफर कर रहा था। सामने नवाब साहब बैठे थे। उनके पास नाश्ते के लिए एक सुराही और एक गिलास था। नवाब साहब ने बहुत तमीज से कुल्ला किया, हाथ धोया, फिर खाली गिलास को ही नाश्ते की तरह पेश किया और हवा में कौर तोड़-तोड़ कर खाया। नवाब साहब के पास खाने के लिए कुछ नहीं था, पर वे अपनी शान, अकड़ व ‘लखनवी तहजीब’ का दिखावा छोड़ना नहीं चाहते थे। गरीबी छिपाने के लिए उन्हें झूठा आडम्बर करना पड़ा। लेखक उनकी मजबूरी समझ गया। उसने दिखावे के बजाय सच्चाई का संदेश दिया। दिखावा कुछ समय तक ही चलता है, सच्चाई देर-सवेर सामने आ ही जाती है।
- (i) नवाब साहब ने ट्रेन में नाश्ता कैसे किया?
- उत्तर: नवाब साहब ने तमीज से कुल्ला और हाथ धोने के बाद खाली गिलास को ही नाश्ते की तरह पेश किया और हवा में काल्पनिक कौर तोड़-तोड़कर खाए।
- (ii) नवाब साहब की क्या समस्या थी?
- उत्तर: नवाब साहब के पास खाने के लिए कुछ नहीं था, लेकिन वे अपनी झूठी शान, अकड़ और लखनवी तहजीब का दिखावा छोड़ना नहीं चाहते थे अर्थात् अपनी स्थिति व गरीबी को छिपाना उनकी मुख्य समस्या थी।
- (iii) इस केस स्टडी से हमें क्या सीख मिलती है?
- उत्तर: इस केस स्टडी से यह सीख मिलती है कि हमें जीवन में कभी भी झूठा दिखावा या आडंबर नहीं करना चाहिए, क्योंकि दिखावा कुछ समय तक ही टिकता है और सच्चाई आखिरकार सामने आ ही जाती है।