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प्रश्न 1. बिहारी के दोहों को ‘गागर में सागर’ क्यों कहा गया है?
उत्तर – बिहारी के दोहों को ‘गागर में सागर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि बिहारी कम शब्दों में बहुत बड़ी और गहरी बात कहते हैं।
प्रश्न 2. बिहारी और पद्माकर किस प्रकार के कवि माने जाते हैं?
उत्तर – बिहारी ‘रीतिसिद्ध’ कवि हैं और पद्माकर ‘रीतिबद्ध’ कवि माने जाते हैं।
प्रश्न 3. ‘कनक-कनक तैं सौगुनी’ दोहे में ‘कनक’ शब्द के दो अर्थ क्या हैं?
उत्तर: ‘कनक-कनक तैं सौगुनी’ दोहे में ‘कनक’ शब्द के दो अर्थ हैं: 1. सोना (धन-दौलत) और 2. धतूरा (एक नशीला फल)।
प्रश्न 4. पाठ में आए मुहावरे ‘दुनिया की हवा लगना’ का अर्थ लिखिए।
उत्तर – पाठ में आए मुहावरे ‘दुनिया की हवा लगना’ का अर्थ – संसार के दोषों या बुराइयों का प्रभाव पड़ना ।
प्रश्न 5. बिहारी ने श्रीकृष्ण को ‘दुनिया की हवा लग गई है’ ऐसा उलाहना क्यों दिया है?
उत्तर – कवि लंबे समय से दीन स्वर में कृष्ण को पुकार रहे हैं, पर कृष्ण उनकी सहायता नहीं कर रहे। इसलिए कवि उलाहना देते हुए कहते हैं कि जैसे दुनिया के लोग दूसरों के दुख की अनदेखी कर अपनी प्रभुता में मस्त रहते हैं, वैसे ही कृष्ण भी कर रहे हैं।
प्रश्न 6. बिहारी के दोहे “कनक कनक तैं सौगुनी मादकता अधिकाय” में कौन-सा अलंकार है?
उत्तर – बिहारी के दोहे “कनक कनक तैं सौगुनी मादकता अधिकाय” में यमक अलंकार है ।
प्रश्न 7. रीतिकाल की प्रमुख काव्य भाषा और छंद कौन-से हैं?
उत्तर – रीतिकाल की प्रमुख काव्य भाषा ‘ब्रज’ है। इस काल में मुख्य रूप से दोहा, सवैया और कवित्त छंदों का प्रयोग बहुतायत से हुआ है।
प्रश्न 8. बिहारी ने मुख्य रूप से किन छंदों का प्रयोग किया है?
उत्तर – बिहारी ने ‘दोहा’ छंद का प्रयोग किया है। जो एक मात्रिक छंद है जिसमें कुल 24 मात्राएँ होती हैं ।
प्रश्न 9. गोपी ने श्रीकृष्ण की मुरली क्यों छिपाई?
उत्तर – गोपी को श्रीकृष्ण से बातें करना अच्छा लगता है। वह जानती है कि जब तक मुरली उसके पास रहेगी, कृष्ण उससे बात करने के लिए विवश होंगे, इसी ‘बतरस’ (बातचीत के आनंद) के लालच में उसने मुरली छिपाई ।
प्रश्न 10. पद्माकर के कवित्त में ‘अबीर’ और ‘अहीर’ शब्दों का प्रयोग किस संदर्भ में हुआ है?
उत्तर – पद्माकर के कवित्त में ‘अबीर’ आँखों में पड़े गुलाल के लिए प्रयुक्त हुआ है, जिसे धोकर निकाला जा सकता है। ‘अहीर’ श्रीकृष्ण के उस प्रेम के लिए प्रयुक्त हुआ है जो आँखों में बस गया है और धोने से भी नहीं निकल रहा।
प्रश्न 11. बिहारी को ‘बहुज्ञ’ कवि क्यों कहा जाता है?
उत्तर – बिहारी को ‘बहुज्ञ’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे आयुर्वेद, ज्योतिष, राजनीति और लोक-व्यवहार जैसे अनेक शास्त्रों के ज्ञाता थे। उनके दोहों में इस विविध ज्ञान की स्पष्ट छाप मिलती है ।
प्रश्न 12.”धन का नशा मादक पदार्थों से भी अधिक खतरनाक होता है।” बिहारी के दोहे को भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – बिहारी के इस दोहे के अनुसार, धतूरे (मादक पदार्थ) को खाने से नशा होता है, लेकिन सोने (धन) को केवल ‘पाने’ मात्र से ही व्यक्ति पागल (मदमस्त) हो जाता है। मादक पदार्थों का नशा कुछ समय के बाद उतर जाता है, लेकिन धन का नशा स्थाई होता है और व्यक्ति की सहजता और सोचने-विचारने की शक्ति को नष्ट कर देता है।
प्रश्न 13. ग्रीष्म ऋतु ने संसार को ‘तपोवन’ जैसा कैसे बना दिया है?
उत्तर – ग्रीष्म ऋतु ने संसार को ‘तपोवन’ जैसा इसलिए बना दिया है क्योंकि भयंकर गर्मी (निदाघ) से व्याकुल होकर परस्पर शत्रुता रखने वाले जीव जैसे सांप, मोर, हिरन और बाघ एक साथ बैठे हैं। तपोवन में भी हिंसक जीव अपनी शत्रुता भूलकर शांत रहते हैं ।
प्रश्न 14. बिहारी और पद्माकर के शिल्प-सौंदर्य की तुलना कीजिए।
उत्तर – बिहारी और पद्माकर के शिल्प-सौंदर्य की तुलना को निम्न प्रकार से समझ सकते है – बिहारी ने ‘दोहा’ छंद का प्रयोग किया है, जबकि पद्माकर ने ‘कवित्त और सवैया’ का। दोनों की भाषा ब्रज है, परंतु बिहारी की भाषा लाक्षणिक और मुहावरेदार है, वहीं पद्माकर की भाषा में अनुप्रास की झड़ी और मधुरता अधिक है। बिहारी अलंकारों (यमक, अनुप्रास, श्लेष) के माध्यम से चमत्कार पैदा करते हैं, जबकि पद्माकर दृश्य-विधान और कल्पना की उड़ान पर बल देते हैं।