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प्रश्न 1. ‘छायावाद’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया?
उत्तर – ‘छायावाद’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग मुकुटधर पांडेय ने अपने लेख ‘हिंदी में छायावाद’ में किया था।
प्रश्न 2. निराला की कविताओं के छंद को क्या कहा जाता है?
उत्तर – निराला की कविताएँ मात्रा और वर्ण के निश्चित बंधनों से मुक्त हैं, इसलिए इन्हें ‘मुक्त छंद’ कहा जाता है।
प्रश्न 3. जयशंकर प्रसाद की कविता में ‘भारती’ किसे कहा गया है?
उत्तर – ‘भारती’ ज्ञान और सत्य की देवी माँ सरस्वती को कहा गया है, जो स्वतंत्रता की पुकार कर रही हैं।
प्रश्न 4. छायावाद के चार प्रमुख स्तंभ कौन-कौन से हैं?
उत्तर – छायावाद के चार प्रमुख स्तंभ जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं।
प्रश्न 5. ‘हिमांद्रि तुंग श्रृंग से’ गीत किस नाटक से लिया गया है और इसके रचयिता कौन हैं?
उत्तर – हिमांद्रि तुंग श्रृंग यह गीत जयशंकर प्रसाद के प्रसिद्ध नाटक ‘चंद्रगुप्त’ के चौथे अंक से लिया गया है।
प्रश्न 6. ‘वह तोड़ती पत्थर’ कविता में ‘इलाहाबाद के पथ पर’ उल्लेख का क्या महत्व है?
उत्तर – इलाहाबाद का नाम देकर कवि इस घटना को सच्चा, प्रामाणिक और अपनी आँखों देखी घटना बताना चाहते हैं।
प्रश्न 7. प्रसाद जी के गीत में ‘अमर्त्य वीर पुत्र’ किसे कहा गया है?
उत्तर – प्रसाद जी ने भारतवासियों को ‘अमर्त्य वीर पुत्र’ (अमर वीरों की संतान) कहकर संबोधित किया गया है, ताकि उनमें साहस का संचार हो सके।
प्रश्न 8. ‘रुई ज्यों जलती हुई भू’ में कौन-सा अलंकार है और इसका अर्थ क्या है?
उत्तर – ‘रुई ज्यों जलती हुई भू’ इसमें उपमा अलंकार है। इसका अर्थ है कि धरती भीषण गर्मी के कारण अंदर ही अंदर वैसे ही सुलग रही है जैसे रुई में लगी आग बाहर नहीं दिखती पर भीतर जलती रहती है।
प्रश्न 9. ‘वह तोड़ती पत्थर’ कविता में किस ऋतु और समय का वर्णन है?
उत्तर – ‘वह तोड़ती पत्थर’ कविता में ग्रीष्म ऋतु (गर्मियों के दिन) और दोपहर के समय का वर्णन है, जब सूर्य प्रचंड गर्मी बरसा रहा होता है और लू चल रही होती है।
प्रश्न 10. ‘प्रयाण गीत’ किसे कहते हैं?
उत्तर – ‘प्रयाण गीत’ युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए उत्साह जगाने के उद्देश्य से गाया जाने वाला सामूहिक गीत ‘प्रयाण गीत’ या ‘प्रस्थान गीत’ कहलाता है।
प्रश्न 11. ‘वह तोड़ती पत्थर’ कविता में व्याप्त सामाजिक विषमता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘वह तोड़ती पत्थर’ कविता में कवि ने शोषक और शोषित के बीच के अंतर को परिवेश के माध्यम से दिखाया है। एक ओर मज़दूरनी भीषण गर्मी में छायाहीन पेड़ के नीचे पत्थर तोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर सामने ऊँचे भवन (अट्टालिका), सजावटी पेड़ (तरुमालिका) और दीवारें (प्राकार) हैं, जो संपन्न वर्ग की सुख-सुविधाओं और उनकी संवेदनहीनता को दर्शाते हैं।
प्रश्न 12. ‘प्रयाण गीत’ (हिमांद्रि तुंग श्रृंग से) के माध्यम से प्रसाद जी ने देशवासियों को क्या संदेश दिया है?
उत्तर – ‘प्रयाण गीत’ में प्रसाद जी देशवासियों को ‘अमर्त्य वीर पुत्र’ कहकर संबोधित करते हैं और उन्हें याद दिलाते हैं कि उनका इतिहास वीरता का रहा है। वे उन्हें मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ होकर संघर्ष के पावन मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने का संदेश देते हैं।
प्रश्न 13. ‘वह तोड़ती पत्थर’ कविता के आधार पर निराला की सामाजिक चेतना और संवेदनशीलता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर – वह तोड़ती पत्थर कविता के आधार पर निराला आर्थिक असमानता और शोषण को देखकर बेचैन होते थे। इस कविता में उन्होंने एक श्रमिक स्त्री के प्रति ‘समानुभूति’ दिखाई है। वे न केवल उसके कठिन श्रम का वर्णन करते हैं, बल्कि शोषक व्यवस्था पर चोट भी करते हैं। उनके लिए मज़दूरनी का हथौड़ा केवल पत्थर पर नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर प्रहार है जो गरीबों का शोषण करती है।
प्रश्न 14. निराला की काव्य-भाषा और शिल्प-सौंदर्य की विवेचना कीजिए।
उत्तर – निराला ने कविता को छंदों के बंधन से मुक्त कर ‘मुक्त छंद’ का प्रयोग किया। उनकी भाषा सरल और बोलचाल की होते हुए भी आवश्यकतानुसार संस्कृतनिष्ठ (तत्सम) शब्दों जैसे- अट्टालिका, प्राकार आदि का प्रयोग करती है। वे शब्दों के माध्यम से पाठक के सामने सजीव चित्र खींचने में निपुण हैं।